शनिवार, 29 दिसंबर 2012

फिर


फिर


यहॉं बैरीकेड्स लगे हैं

इससे आगे जाना लाठीचार्ज के लिए आमंत्रण है


प्रधानमंत्री से आप मिल नहीं सकते

आपको बता दिया गया है कि ज्ञापन

उधर चौकीदार को भी दिया जा सकता है

 

हर चीज की एक मर्यादा है

यदि आपको लगता है कि आप ज्‍यादा योग्‍य हैं

तो फिर सांसद का चुनाव क्‍यों नहीं लड़ते हैं

वैसे भी ऑंसूगैस ही पहले छोड़ी जाएगी

 

हम कहना चाहते हैं कि हम पर अत्‍याचार हुआ है

हमें नहीं मिला है न्‍याय

और हमें खदेड़ दिया गया है हर जगह से

 

ठीक है। हम भी उतने ही दुखी हैं

हमारा भी परिवार है, लड़के हैं, लड़कियॉं हैं

लेकिन रैली के लिए जगह नहीं है सड़कों पर

अनशन के लिए बसाया गया है बीस मील दूर

एक उजड़ा गॉंव

 

फिर। फिर।

क्‍या करें हम फिर।

 

दिमाग फिर गया है तुम्‍हारा

अब गोली चलाई जाएगी।

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2 टिप्‍पणियां:

अजेय ने कहा…

गोली चलने से पहले यह प्रतिरोध एक रस्म बन जाएगा . फिर सत्तातंत्र को ऐसे प्रतिरोधों की आदत हो जाए गी

फिर ......

नीरज पाल ने कहा…

अब गोली ही भर तो बची रह गयी है, नहीं तो क्या कुछ बचा है जो सत्ता तंत्र ने छोड़ा हो? अत्याचार, न्याय बेमानी है, और ऐसी बेमानी बातें करने से उनके कानों पर जूं नहीं रेंगती.